Saturday, March 1, 2008

"मां"

मां
पहली बार खुली,

जब आंख मेरी

सबसे पहले देखी,

प्यारी सूरत तेरी

देख मुझे आंखों से

तेरी बूंदें कुछ टपकीं

हृदयविभोर हो, तेरे सीने को

मैं लपकी. नौ मास तक

अपने अन्दर, लिए साथ मुझे,

डगर - डगर पर पडे उठाने,

दर्द कई तुझेबडी राह ताकी,

बहुत तू तडपी मुझसे मिलने

देख मुझे तेरे हृदय के दीप लगे हैं जलने.

पाई खुशी, मिला तुझे तेरा जहां

पहली बार फूटा जब मेरे मुंह से मां

अचंभित हूं मैं,

तुझे कब पता चल जाता था,

मेरा कोई भी दर्द, तेरे हृदय को भेद जाता था.

प्यार है मुझसे इतना

तो आज जुदा मत कर

होगी सच में हल्की क्या,

मुझे डोली पर बिठा कर

देख मुझे तेरी आंखों से,

आज फिर बूंदे कुछ टपकी,

रोक ले मां मुझे तेरे सीने को मैं लपकी.

साल कई बीते, आज मेरी बेटी है

देख सूरत उसकी, छवि तेरी याद

आ जाती है यादें तेरी उडा ले जाती हैं वहां,

मेरी बेटी जब पुकारती है मुझे 'मां'

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