...उन्हें अब भूल जाएँगे।
सुहाना था बडा मौसम,
फिज़ा भी खूब रँगीं थी,
किए थे हमने जब वादे
तबीयत खूब अच्छी थी;
ना थी उस वक्त तन्हाई,
नहीं थी कोई रुसवाई,
ना थे तुम यूँ खफा हमसे,
ना तेरी बेवफाई थी।
उन्हें चाहें,
उन्हें पूजें,
उन्हें पलकों पे बिठाएँ,
कभी सोचा किए ऐसा,
.....उन्हें अब भूल जाएँगे।
नहीं वो किस्मत में मेरे,
नहीं मैं काबिल शायद उसके,
कभी माँगा किए उनको,
.....उन्हें दिल से मिटा देंगे।
नहीं नफरत करता उनसे,
ना ही चाहत रखता उनकी,
कभी जोडा किए रिश्ता,
.....हर इक रिश्ता मिटा देंगे।
नहीं जीना था उनके बिन,
था हर इक साँस का वादा,
कभी़............कसम!
खुद को मिटा देंगे।
nitin