मौत,
तू किसी रोज,
एक सहर की तरह आना....
मेरे जिस्म में अभी जब खून दौडता हो-
साँसों के बह्कने का कोई अंदेशा ना हो-
मेरे लबों परउसके इश्क का जाम हो-
दिल में उसके ही प्यार का दर्द और
आँखों मेंउसका ही तस्सवूर हो--
मौत,
तू किसी रोज,
अलसायी सुबह सी आना!!
उसके आँगन जब --
नर्गिस खिलें,
आशियाना जब जिंदगी से चहके...
उस रोज,
किसी रोज,
मौत तू --
चुपके से आनामौत तू किसी रोजनयी जिंदगी देने आना!!
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